इश्क तुमसे हैं

इश्क तुमसे हैं ये दिखाना तो नहीं हैं 
जमाने भर को ये बताना तो नहीं हैं!! 

खामोश आँखों के राज तुम समझो
जग जाहिर कर जताना तो नहीं हैं

तुमने खुब सता लिया मुझको
अब मुझे और सताना तो नहीं हैं

नजरों मे डालकर नजरें रखो
नजरें हमसे चुराना तो नहीं हैं

यूं खफ़ा- खफ़ा से क्यो रहते हो
दिन हिज्र के दिखाना तो नहीं हैं

लाली लगाकर आये हो लबों पे
लबों से लब बचाना तो नहीं हैं

हिज्र के बाद क्या होगा वो देखेंगे 
अभी से अश्क बहाना तो नहीं हैं

मेरे बाद मेरा रकीब आना तो हैं 
अभी से उसका आना जाना तो नहीं हैं! ! ! 

अनुभव अप्रेल 2019 प्रकाशित
- ओम प्रकाश लववंशी संगम

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