कोई कुछ भी कहे
विधा :- गज़ल
शीर्षक :- कोई कुछ भी कहे
कोई कुछ भी कहे कहने दीजिए
हम जैसे है वैसे ही रहने दीजिए
जमाने भर की बातों का क्या
हमें अपने काम करने दीजिए
सागर बनाकर खारा ना करो
मीठा झरना हूँ बहने दीजिए
तुम्हारी कब से सुन रहा हूँ
अब तो मुझे भी कहने दीजिए
ये आँसू खुशी के आँसू हैं
ये बहते हैं तो बहने दीजिए
इतने भर से ही रुकना नहीं
अभी तो आगे बढ़ने दीजिये
अभी हिम्मत हारा नहीं हूँ मैं
हौसला हैं मुझे लड़ने दीजिए
तुम्हारे कसमें वादे तुम रखो
तुमसे ना होगा रहने दीजिये
अनुभव मई 2019 में प्रकाशित
लेखक परिचय
नाम - ओम प्रकाश लववंशी
साहित्यिक उपनाम - 'संगम'
पता- कोटा , राजस्थान
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