कविता:- हमको मंजिल पाना है
शीर्षक- हमको मंजिल पाना है कोशिशें कभी कम ना होगी छोटी हार से आँखे नम ना होगी, जारी है सफ़र हमारा चाहत मंजिल से कम ना होगी। कहने वाले तो कुछ भी कहते हैं, मंजिल के लिए ही तो हम सारे दर्द सहते हैं। हमें पता हैं हमें क्या करना हैं? फिर फालतू की बातों से क्यों डरना हैं। पैर भी फिसलेंगे साँसे भी फूलेगी लेकिन हमने जो ठान लिया वो तो करना हैं, हमको मंजिल पाना हैं। हमको मंजिल पाना हैं। लेखक परिचय नाम - ओम प्रकाश लववंशी 'संगम' अनुभव पत्रिका अप्रेल 2020 अंक में प्रकाशित
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