शीर्षक- हमको मंजिल पाना है कोशिशें कभी कम ना होगी छोटी हार से आँखे नम ना होगी, जारी है सफ़र हमारा चाहत मंजिल से कम ना होगी। कहने वाले तो कुछ भी कहते हैं, मंजिल के लिए ही तो हम सारे दर्द सहते हैं। हमें पता हैं हमें क्या करना हैं? फिर फालतू की बातों से क्यों डरना हैं। पैर भी फिसलेंगे साँसे भी फूलेगी लेकिन हमने जो ठान लिया वो तो करना हैं, हमको मंजिल पाना हैं। हमको मंजिल पाना हैं। लेखक परिचय नाम - ओम प्रकाश लववंशी 'संगम' अनुभव पत्रिका अप्रेल 2020 अंक में प्रकाशित
संगम पब्लिकेशन आओ-ना फिर से तुम काव्य संग्रह लेखक:- ओम प्रकाश लववंशी “संगम" ISBN 978-1-63886-031-0 कॉपीराइट.2021 ओम प्रकाश लववंशी “संगम" संगम प्रकाशन सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पुस्तक का कोई भी हिस्सा लेखक की अनुमति के बिना किसी भी माध्यम में पुनःप्रकाशित नहीं किया जा सकता है। कवर डिजाइनर- एडिटर - मनीष लववंशी , ओम प्रकाश लववंशी , अनिल लववंशी अनुक्रमणिका क्रम सं. शीर्षक पेज नं. भूमिका , समर्पित 1 माँ चर्मण्यवती 12 2 हमको मंजिल पाना हैं 13 3 लक्ष्य पाना है 14 4 लोग कुछ भी कहेंगे 15 5 संघर्षरत 16 6 खतरनाक वक़्त 18 7 जरा इस तरह सोचो 19 8 तू चल 20 9 अकेले चलो 21 10 नींव भरने दो 22 11 आशा 23 12 हम फिर आयेंगे 24 13 प्रेम एक साधना 26 14 प्रेम कविताएं 27 15 प्रेम पत्र 29 16 प्रेम 30 17 मेरे कान्हा 31 18 बंशी चूम गयी 32 19 माँ 33 20 पिता 34 21 बेकसूर बेटियाँ 35 22 परिवर्तन अब हो 37 23 घर से दूर 38 24 खेतों की महक 39 25 महाराणा प्रताप 40 26 बचपन 42 27 बचपन की यादें 43 28 ...
मुलाकात भाग-5 : वैसे मिलने का मन तो रोज करता है लेकिन हमारी मुलाकात अधिकतर वीक एंड पर ही संभव होती थी। हर बार की तरह वहीं KST के किनारे पर मुलाकात हुई। कुछ देर तक दो चार बातें हुई। पता नहीं क्यों आज वो ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी,येलो सूट उस पर खूब जन्च रहा था । मै उसके हाथ में हाथ और नजरों में नजरें डालें बात कर रहा था ,मैंने कहा कहीं और दूसरी जगह चले घूमने। उसने कहा – हाँ,चलो पर चलना कहाँ है? यह तो बताओ। अच्छा तुम अदरक,पुदीने की स्पेशल चाय पिला रहे थे ना उसने कहा। अरे हाँ वह तो मेरी फेवरेट है , चलो फिर अभी पिला देते हैं। लगता है वो पागल चश्मिस भी चाय की ज्यादा ही शौकीन थी या फिर मेरे हाथ से बनी चाय पीना था। वह मेरे साथ बाइक पर बैठ गई और मैंने बाइक स्टार्ट की और रूम कि ओर बढ़ना शुरू किया। हमने रास्ते में रतलामी नमकीन वाले से नमकीन पैक करवाए, बातें करते हुए रूम पर पहुँच गए। जैसे ही उसने अंदर प्रवेश किया ,हाउ स्वीट यार ,गुलाब के फूलों को निहारने लग गई,मैंने गार्डन में दो कुर्सियां लगा दी और कहा आओ बैठो! मेरा मन नहीं कर रहा बैठने का मैं तो सेल्फी लूंगी ,आप चाय बनाओ ।मैंने कह...
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