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Showing posts from August, 2020

माँ चर्मण्यवती

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तुम मिले

तुम मिले : तुम मिले और मेरी जिंदगी में आ गये, मैं तुम्हारे लिए ही स्टेटस लगाता हूँ ताकि तुम मेरी फीलिंग को समझ सके, तुम कहीं बार मेरे मैसेज को अनदेखा करते हो, फिर भी मैं तुम्हें मैसेज करता हूँ, तुम बिना गुड नाईट किये सो जाते हो, फिर भी मैं गुड नाइट बोलता हूँ ! और सुबह जब तुम उठते हो तो हमेशा मेरा गुड मॉर्निंग वाला मैसेज मिलता है, फिर तुम इसका जवाब भी देते हो ! Dear crush अब तो समझो -ना क्या अब भी नादान हो ? शायद तुम्हें तो तड़पा कर मजा आता होगा, शायद तुम अनजान हो अभी मैंने अपना बना लिया तुमको, तुम इसे वन साइड लव मानो या पागलपन समझो! पर मैं सच कह रहा हूँ अपना मानता हूं तुमको. . ! ! परिचय  नाम- ओम प्रकाश लववंशी साहित्यिक उपनाम- ‘संगम’ वर्तमान पता- कोटा (राजस्थान ) राज्य- राजस्थान  शहर- कोटा  शिक्षा-  बी.एस. टी. सी. , REET 2015/2018, CTET, RSCIT, M. A. हिन्दी , B. Ed.  कार्यक्षेत्र- अध्ययन, लेखन,  विधा -मुक्तक, कविता , कहानी , गजल, लेख, निबंध, डायरी 

मुलाकात भाग-5

मुलाकात भाग-5 : वैसे मिलने का मन तो रोज करता है लेकिन हमारी मुलाकात अधिकतर वीक एंड पर ही संभव होती थी। हर बार की तरह वहीं KST के किनारे पर मुलाकात हुई। कुछ देर तक दो चार बातें हुई। पता नहीं क्यों आज वो ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी,येलो सूट उस पर खूब जन्च रहा था । मै उसके हाथ में हाथ और नजरों में नजरें डालें बात कर रहा था ,मैंने कहा कहीं और दूसरी जगह चले घूमने। उसने कहा – हाँ,चलो पर चलना कहाँ है?  यह तो बताओ। अच्छा तुम अदरक,पुदीने की स्पेशल चाय पिला रहे थे ना उसने कहा। अरे हाँ वह तो मेरी फेवरेट है , चलो फिर अभी पिला देते हैं। लगता है वो पागल चश्मिस भी चाय की ज्यादा ही शौकीन थी या फिर मेरे हाथ से बनी चाय पीना था। वह मेरे साथ बाइक पर बैठ गई और मैंने बाइक स्टार्ट की और  रूम कि ओर बढ़ना शुरू किया। हमने रास्ते में रतलामी नमकीन वाले से नमकीन पैक करवाए, बातें करते हुए रूम पर पहुँच गए। जैसे ही उसने अंदर प्रवेश किया ,हाउ स्वीट यार ,गुलाब के फूलों को निहारने लग गई,मैंने गार्डन में दो कुर्सियां लगा दी और कहा आओ बैठो! मेरा मन नहीं कर रहा बैठने का मैं तो सेल्फी लूंगी ,आप चाय बनाओ ।मैंने कह...

*मुलाकात* भाग -4

*मुलाकात* भाग -4 : “आज हिम्मत करके आया था कि आज तो प्रपोज कर ही दूंगा”! KST के किनारे लक्खी  बुर्ज पर मिलना था उससे!  मैं असमंजस में था कि क्या गिफ्ट दूं फिर अचानक से याद आया कि गोल्डन पेन दे देता हूँ  हमेशा साथ रखेगी!  Deo छीड़ककर मिलने को तैयार हुआ और जा पहुँचा लक्खी बुर्ज अपने लक के लिए! वह पहले से ही अपनी सहेली के साथ मेरा वेट कर रही थी!  हाय, हेलो के बाद उसकी सहेली दूर चली गई और हम बातचीत करने लगे उसने कहा -आज कुछ खास,  मैंने कहा- ya, !  मैं गुलाब देते हुए बोला -आई लव यू मेरी जान! उसने गुलाब लिया और सीने से लगाकर  बोली- लव यू टू माय डियर, उसने बाहें फैला दी और मैंने भी , हम एक दूसरे की बाहों में समा गए! फिर मैंने गोल्डन पेन दिया तो उसने थैंक्स कहा और आंखें बंद करने के लिए बोली ! ” वन गिफ्ट ओनली फॉर यू” बोला और गाल पर Kiss  कर दिया मैंने आंखें खोली आज हम दोनों बहुत खुश थे ! थोड़ी देर बाद उसकी फ्रेंड भी आ गई उसने कहा , चलो कुछ खाते हैं , फिर हम बुर्ज से उतरकर KST के किनारे लगी दुकानों की तरफ गये! पानी पतासी वाले के पास उनके पाँव थमने लग...

कहानी- मुलाकात भाग-3

मुलाकात” भाग-3 : मैं उसके बताये पते पर टाइम से पहले ही पहुँच गया था,  मिलने की ललक जो थी !  आसमान में पक्षी उड़ रहे थे और पानी की लहरें हिलोरे ले रही थी जैसे बाँहे फैलाकर प्रीतम से मिलने को आतुर हो!  KST के किनारे कबूतरों का झुंड और आसमान में  परिंदे उड रहे थे बहुत ही मनोरम दृश्य था!  मैं बस पक्षियों की चहल कदमी देख रहा था!  अचानक कब वह मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई?  मुझे पता ही नहीं लगा और मैं मन ही मन खुश हो  रहा था ! जैसे मैंने खड़ा होकर पीछे देखा तो वो मुझे वहीं पर मुस्कुराती हुई नजर आई!  मैने पूछा-कब आये ? उसने  मुस्कुराते हुए कहा- बस अभी आई हूँ,  आपको देख रही थी ! आओ बैठो,  मैंने कहा ! फिर हम दोनों KST के किनारे लगे हुए बेंच पर बैठ गए और यूं ही चलती हुई लहरों को , उड़ते हुए पक्षियों को निहारने लगे और इसी बीच  हमारी बातें भी शुरू हुई! दिल करने लगा की काश हम भी  पक्षियों के साथ साथ उड़ते !  सूरज भी धीरे- धीरे ढल रहा था और किशोर सागर के आसपास का दृश्य और मनोरम होता जा रहा था!  देखने वालों की भीड़ भी धीरे-धीर...

कहानी - मुलाकात भाग 2

मुलाकात : मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा,  जब मेंने उसको फिर से देखा तो!  मैं एक बार पहले भी उससे मिल चुका था और अब उसे दूसरी बार देख  रहा था !  हम बस में साथ-साथ  बैठकर  गाँव गए थे ! बस में ही  हमारी पहली मुलाकात हुई और दोस्ती हो गई थी! तब से मैं उसको बहुत मिस कर रहा था !  आज मैं दीदी को  कॉलेज छोड़ने गया था कि जैसे गेट के पास पहुँचा,  चार-  पाँच लड़कियाँ खड़ी हुई थी!  वहाँ पर मेरी नजर रेड ब्लैक सूट वाली,  हाथ में पर्स लिए और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ खड़ी हुई,  आंखों में उम्मीदों की चमक लिये खड़ी लड़की पर पड़ी तो मेरी नजरें वही पर रुक गई!  दीदी कॉलेज के अंदर चली गई!  लड़की के ऊपर से मेरी तो नजरें ही नहीं हट रही थी लेकिन अब तक उसने मुझे नहीं देखा था ! अपनी फ्रेंड के साथ बातें करने में मशगूल हो रही थी, मैं सामने  खड़ा हुआ था लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही थी कि मैं उसके पास जाऊं और उससे बात करूं लेकिन वहाँ से जाने का मन भी नहीं कर रहा था ! बस में एक कवि की तरह कल्पनाओं में खोता जा रहा था,...

मुलाकात भाग 1

मुलाकात : उसने जब अपना बैग उतारा तो उसकी हलचल देख मुझे महसूस हो गया था कि वह बस से उतरने वाली है! उसने घर पर कॉल किया कि हम आ गए लेने आ जाओ!  दिल उदास हो गया और निगाहें उस पर ही टिक गई थी , जाते जाते उसने इशारे से ही बाय बोल दिया हल्की मुस्कान लिए हुए और मैं दिल थाम कर बैठा हुआ था ! वैसे तो हमारी दोस्ती को ज्यादा वक्त नहीं हुआ था , जब मैं कोटा से बस मे बैठकर गांव के लिए निकला तो  अगले चौराहे से 2 लड़कीया  बस में चढ़ी ! मैं मेरी सीट पर अकेला ही था तो मैं सोच रहा था कि मेरे पास आकर बैठेगी पर हुआ नहीं ऐसा ! मेरे आगे वाली सीट पर भी जगह खाली थी तो वह दोनों उस पर बैठ गई!  बस ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी कुछ देर बाद वह दोनों उठकर मेरे पास आ बैठी!  वह दोनों बहने थी मुझे बाद में पता चला,  छोटी वाली मेरे पास और छोटी वाली के पास बड़ी वाली बैठ गई! ईयर फोन लगाकर YouTube देख रही थी मैंने अपनी डायरी निकाली और पढ़ने लग गया!  कुछ देर बाद उनमें कानाफुसी हुई और बड़ी बहन और आगे वाली सीट पर जा बैठी!  मैं यह सब नोटिस कर रहा था,  वह भी मुझे नोटिस कर रही थी ! मैं नजर...

पानीपूरी वाली प्रेमिका (कहानी)

पानीपूरी वाली प्रेमिका :   यूं ही चलते चलते मैंने  रितिका से पूछ लिया था कि ‘पानीपूरी खाओगे’ ,  उसने हाँ में गर्दन  हिलाते हुए कहा- हाँ, जरूर,  तुम जो खिला रहे हो ! हम रोड क्रॉस करते हुए पानी पूरी वाले के पास गए!  दोनों पानीपुरी खाने लगे ! वैसे तो रितिका और मैं दोनों साथ-साथ कोचिंग जाते थे पर बातचीत नहीं होती थी!  मैं सोचता था कि रितिका मुझसे बोले और शायद वह भी यही !  रितिका मेरे मकान मालिक की लड़की थी  मैं उनके यहाँ नया-नया आया था ! मेरा रूम ऊपर था और रितिका का परिवार नीचे रहता  था! मैं शहर के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानता था,  बस रूम से कोचिंग और कोचिंग से फिर रूम! आज पानी पुरी ने हमारी दोस्ती करा दी थी! वह पूरे रास्ते में ढेर सारी बातें करती रही और मैं टकटकी लगाकर सुनता हुआ उसे ही निहारता रहा ! पता नहीं आज घर जल्दी आ गया था ! साइकिल पार्किंग करके मैं अपने रूम में  गया  और ड्रेस चेंज करके टिफिन खोला ही था कि रितिका भी ऊपर छत पर आ गई,  मेरे रुम के सामने टीन शेड लगे हुए थे और साइड में खुली छत थी ! मेरे रुम के आध...

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मैं हूँ नन्हा सा परिन्दा

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