आओ ना फिर से तुम (गाँव के बाहर )
विधा- कविता शीर्षक:- आओ -ना फिर से तुम गाँव के बाहर पहाड़ों से रिसकर आये बारिश के पानी से लबालब भरा हुआ मिट्टी का तालाब, किनारे पर छोटे-छोटे पौधे और उन पर रंग बिरंगे फूल, फूलों के इर्द-गिर्द मचलती हुई तितलियाँ, गोधूलि बेला सूरज अपने घर को जाता हुआ , और जंगल से पशुओं का आना, उन सुनहरे साँझ के लम्हों में तेरे संग बातें करना, कौन अभागा होगा जो भूल पायेगा यह सब, वक्त भले ही ना आये फिर से , महसूस तो किया होगा यह सब तुमने फिर से कभी ना भूल पाने वाले चिर स्थाई क्षण हो गये हैं जिंदगी के, मैं तो चाहता हूँ इनको दोहराएं फिर से हम, वही बचपन के किस्से वहीं गाँव, वहीं मौज मस्ती!! लेखक परिचय अनुभव पत्रिका जुलाई 2019 में प्रकाशित नाम - ओम प्रकाश लववंशी